भोपाल का मास्टर प्लान 2047 पढ़ा, अब इंदौर की बारी है

Founder and CEO of Micro Mitti Manoj Dhanotiya
Manoj Dhanotiya Founder of Micro Mitti

Founder and CEO of Micro Mitti

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एक सील हुई दुकान से शुरू होती है यह कहानी

भोपाल की किसी रहवासी कॉलोनी में एक परिवार ने बीस साल पहले मकान के आगे के कमरे में छोटी सी दुकान खोली थी। उसी दुकान से बच्चों की फीस भरी गई, बेटी की शादी हुई, और घर चला। इस साल उस परिवार को नगर निगम का नोटिस मिला, क्योंकि कागज़ों में वह ज़मीन सिर्फ रहने के लिए है, दुकान के लिए नहीं।

यह किसी एक परिवार की कहानी नहीं है। सुप्रीम कोर्ट में चल रहे मामले की रिपोर्टिंग के अनुसार भोपाल नगर निगम ने रहवासी इलाकों में चल रहे लगभग 62,500 व्यावसायिक प्रतिष्ठान सूचीबद्ध किए, जिनमें से 8,084 को नोटिस दिए गए और करीब 190 को तीन दिन के लिए बंद कराया गया (नवभारत)। इन सबकी जड़ में एक ही बात है। भोपाल आज भी 2005 के मास्टर प्लान पर चल रहा है, जबकि शहर 2026 में जी रहा है।

अब यही सवाल इंदौर के सामने रखिए। हमारे शहर का मौजूदा मास्टर प्लान 1 जनवरी 2008 को लागू हुआ था और उसकी अवधि 31 दिसंबर 2021 को ही पूरी हो चुकी है। पिछले लगभग पांच साल से देश का सबसे स्वच्छ शहर एक ऐसे नक्शे पर चल रहा है जिसकी तारीख निकल चुकी है।

25 सितंबर 2026 को भोपाल विकास योजना 2047 का प्रारूप मध्यप्रदेश राजपत्र में प्रकाशित हुआ। मैंने इसके सभी 259 पन्ने पढ़े, हर तालिका देखी, और एक ही सवाल के साथ पढ़े। यह दस्तावेज़ हमें इंदौर के आने वाले मास्टर प्लान के बारे में क्या बताता है? इस लेख में वही सब है जो मुझे मिला।

भोपाल को नया नक्शा मिलने में 21 साल क्यों लगे

भोपाल का मौजूदा मास्टर प्लान 1995 में प्रकाशित हुआ था और उसे 2005 तक के लिए बनाया गया था। सोचिए, जिस योजना की अवधि 2005 में खत्म होनी थी, उसी पर शहर 2026 तक चलता रहा। प्रारूप के पहले अध्याय में खुद दर्ज है कि इस बीच नई योजना बनाने की कई कोशिशें हुईं और हर बार अधूरी रह गईं।

वर्ष

क्या हुआ

1995

भोपाल विकास योजना 2005 प्रकाशित, जो आज तक लागू है

2006

2021 तक की योजना का प्रारूप आया, लेकिन अंतिम रूप नहीं ले सका

2020

2031 तक की योजना का प्रारूप प्रकाशित, 254 गांव जोड़े गए

2023

आपत्तियों के बाद संशोधित 2031 प्रारूप दोबारा प्रकाशित

फरवरी 2024

नगरीय विकास विभाग ने प्रारूप लौटाया और 2047 की ज़रूरतों के हिसाब से नई योजना बनाने को कहा

22 सितंबर 2026

सुप्रीम कोर्ट ने प्रारूप प्रकाशित करने की अनुमति दी

25 सितंबर 2026

भोपाल विकास योजना 2047 का प्रारूप राजपत्र में प्रकाशित

फरवरी 2024 में प्रारूप लौटाते समय विभाग ने तीन निर्देश दिए थे। पहला, योजना 2047 की अनुमानित ज़रूरतों पर बने। दूसरा, शहर के जनप्रतिनिधियों से दोबारा चर्चा हो। तीसरा, CEPT अहमदाबाद की पुरानी रिपोर्ट को ध्यान में रखा जाए। उपग्रह चित्रों और भूमि उपयोग के विश्लेषण में इसरो के राष्ट्रीय सुदूर संवेदन केंद्र, हैदराबाद और मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद ने मदद की।

एक बात और ध्यान रखिए। सुप्रीम कोर्ट ने प्रारूप प्रकाशित करने की अनुमति तो दी है, लेकिन अंतिम योजना जारी करने से पहले सरकार को अदालत को जानकारी देनी होगी, और अगली सुनवाई 23 नवंबर को है (नवभारत)। यानी यह योजना अभी अंतिम नहीं है।

एक नज़र में भोपाल 2047

विषय

प्रारूप में क्या है

निवेश क्षेत्र

1,016.90 वर्ग किलोमीटर, 254 गांव

2047 की अनुमानित आबादी

लगभग 45 लाख

शहर की बनावट

आठ उपनगर, कोलार को नया उपनगर बनाया गया

अगले 21 साल में विकसित होने वाली ज़मीन

लगभग 30,000 हेक्टेयर

हरित क्षेत्र

2005 के लगभग 16 प्रतिशत से बढ़ाकर 27 प्रतिशत

कॉलोनियों में खुला क्षेत्र

10 से बढ़ाकर 12 प्रतिशत

ग्रोथ कॉरिडोर

51 किलोमीटर, 75 मीटर चौड़ा

मेट्रो

27.8 किमी पहला चरण, प्रस्तावित नेटवर्क 95.8 किमी

नगर स्तरीय अधोसंरचना की अनुमानित लागत

लगभग 59,000 करोड़ रुपये

मास्टर प्लान आपकी जेब से कैसे जुड़ा है

ज़्यादातर लोग मास्टर प्लान को सरकारी फाइल समझकर छोड़ देते हैं। सच यह है कि यह किसी भी शहर का सबसे बड़ा आर्थिक दस्तावेज़ होता है, क्योंकि यह तय करता है कि किस ज़मीन पर क्या बन सकता है और कितना बन सकता है। जब यह बदलता है, तो करोड़ों रुपये की संपत्ति का मूल्य रातों रात बदल जाता है।

आसान भाषा में समझिए कि यह आपके जीवन में कहां आता है।

  • आपकी दुकान वैध है या नहीं। घर के आगे की दुकान, कोचिंग, क्लिनिक या दफ्तर चल सकता है या नहीं, यह मास्टर प्लान का भूमि उपयोग तय करता है। भोपाल की सीलिंग इसी का उदाहरण है।
  • आप कितनी मंज़िल बना सकते हैं। आपके प्लॉट पर कितना निर्माण हो सकता है, इसे FAR यानी फ्लोर एरिया रेशियो कहते हैं। 1,000 वर्ग फुट के प्लॉट पर FAR 1.5 हो तो 1,500 वर्ग फुट बनेगा, और FAR 3 हो तो 3,000 वर्ग फुट।
  • गांव की ज़मीन कब शहर बनेगी। खेती की ज़मीन आवासीय या वाणिज्यिक ज़ोन में आते ही उसकी कीमत कई गुना हो जाती है। किसान के लिए यही सबसे बड़ा फैसला होता है।
  • सड़क आपके घर से निकलेगी या नहीं। मास्टर प्लान की सड़कें पहले से तय होती हैं। इंदौर में अभी इसी साल मास्टर प्लान की 23 सड़कों में से 17 पर काम चल रहा है, और बची हुई सड़कों के रास्ते में आने वाले 1,275 मकान और दुकानें बाधक के रूप में चिन्हित की गई हैं (पत्रिका)।
  • आपका फ्लैट कितने का बिकेगा। बिल्डर जितना FAR पाता है, उसकी लागत उतनी ही फ्लैटों में बंटती है। FAR का हर बदलाव अंत में घर की कीमत में दिखता है।

इसीलिए मैं कहता हूं कि मास्टर प्लान पढ़ना सिर्फ बिल्डर का काम नहीं है। जिसके पास एक प्लॉट है, एक दुकान है या घर खरीदने का सपना है, उसके लिए भी यह उतना ही ज़रूरी है।

खोज 1: “आपकी ज़मीन किस लिए है” से “आपकी सड़क कितनी चौड़ी है” तक

भोपाल 2047 की सबसे बड़ी खोज एक वाक्य में कहूं तो यह है कि सरकार ने भूमि उपयोग की सोच छोड़कर जोनिंग की सोच अपना ली है। प्रारूप खुद साफ शब्दों में लिखता है कि भूमि उपयोग एक प्लॉट पर एक ही उपयोग तय करता है, जबकि जोनिंग एक प्लॉट पर कई उपयोगों की अनुमति देती है, और भूमि उपयोग की व्यवस्था विकास को सीमित करती है।

इसका मतलब यह है कि अब आवासीय ज़ोन में भी दुकान, क्लिनिक, कोचिंग या दफ्तर जैसी गतिविधियां संभव होंगी, बशर्ते आपका प्लॉट उतनी चौड़ी सड़क पर हो जितनी उस गतिविधि के लिए तय है। 9 मीटर की सड़क पर किराना और क्लिनिक जैसी रोज़मर्रा की ज़रूरतें, और जैसे जैसे सड़क चौड़ी होती है, वैसे वैसे बड़ी गतिविधियों की अनुमति बढ़ती जाती है।

सोचिए, भोपाल में जिन 62,500 प्रतिष्ठानों पर सवाल उठा, उनमें से बहुतों का रास्ता यही जोनिंग है। मेरी नज़र में सरकार ने सीलिंग के संकट से सीखकर यह समझ लिया है कि शहर को ज़बरदस्ती अलग अलग खानों में बांटना अब संभव नहीं।

शहर को किन ज़ोनों में बांटा गया है

ज़ोन

क्या है

क्षेत्रफल (हेक्टेयर)

RG-1

2005 की योजना के पहले से विकसित आवासीय क्षेत्र, पुनर्विकास पर ज़ोर

3,366.93

RG-2

2005 की योजना में प्रस्तावित आवासीय क्षेत्र, सीमित मिश्रित उपयोग

8,131.27

RG-3

अरेरा कॉलोनी, श्यामला हिल्स, चार इमली जैसे कम घनत्व वाले पुराने इलाके

474.00

RG-4

2047 की मांग के लिए नया आवासीय क्षेत्र, पूर्ण मिश्रित उपयोग

12,820.91

RG-5

पर्यावरण की दृष्टि से संवेदनशील, बहुत कम घनत्व

1,447.00

GC

ग्रोथ कॉरिडोर

2,448.84

CMU-1, 2, 3

वाणिज्यिक मिश्रित उपयोग, एमपी नगर से लेकर नए उपनगर केंद्र तक

1,348.97

I-1, I-2

औद्योगिक

2,137.25

LW

लॉजिस्टिक्स, वेयरहाउसिंग और थोक

771.44

PSP

सार्वजनिक और अर्ध सार्वजनिक

4,887.97

इस तालिका में दो बातें मुझे सबसे दिलचस्प लगीं। पहली, सबसे बड़ा हिस्सा RG-4 का है, यानी सरकार भविष्य की आबादी को पूरी तरह मिश्रित उपयोग वाले नए इलाकों में बसाना चाहती है, जहां प्रारूप के शब्दों में “बाज़ार की मांग के अनुरूप” काम करने की छूट होगी। दूसरी, शुद्ध वाणिज्यिक ज़ोन शहरी क्षेत्र का सिर्फ 2.21 प्रतिशत है। इसका कारण यह नहीं कि व्यापार कम होगा, बल्कि यह कि व्यापार अब अलग ज़ोन में नहीं, बल्कि आवासीय ज़ोनों के भीतर चौड़ी सड़कों पर होगा।

खोज 2: FAR का नया गणित, जहां ज़मीन के साथ सिर्फ “बेस” आता है

भोपाल 2047 में FAR के दो हिस्से हैं। एक है बेस FAR, जो ज़मीन के साथ अपने आप मिलता है। दूसरा है अधिकतम FAR, जो सड़क की चौड़ाई और प्लॉट के आकार के साथ बढ़ता है। बेस और अधिकतम के बीच का पूरा FAR खरीदना होगा, जिसमें आधा प्रीमियम FAR के रूप में सरकार को भुगतान करके और आधा बाज़ार से TDR प्रमाण पत्र खरीदकर मिलेगा।

सड़क जितनी चौड़ी, निर्माण उतना ज़्यादा

सड़क की चौड़ाई

न्यूनतम प्लॉट (वर्ग मीटर)

अधिकतम ऊंचाई

बेस FAR

अधिकतम FAR

प्लॉटेड मकान, किसी भी सड़क पर

40 से 1,500 से अधिक

12.5 मीटर

1.25

1.50

12 मीटर

1,000

18 मीटर

1.25

1.75

18 मीटर

1,500

24 मीटर

1.25

2.00

24 मीटर

2,000

30 मीटर

1.25

2.25

30 मीटर

2,500

45 मीटर

1.25

2.50

36 मीटर

3,000

45 मीटर से ऊपर

1.50

2.75

45 मीटर

3,500

45 मीटर से ऊपर

1.50

3.25

60 मीटर

4,000

45 मीटर से ऊपर

1.50

4.00

75 मीटर या अधिक

4,500

45 मीटर से ऊपर

1.50

कोई सीमा नहीं

एक एकड़ ज़मीन का उदाहरण

मान लीजिए आपके पास एक एकड़ यानी लगभग 4,047 वर्ग मीटर ज़मीन है। अब देखिए कि सिर्फ सड़क बदलने से कहानी कैसे बदलती है।

स्थिति

अधिकतम FAR

कुल निर्माण (वर्ग फुट, लगभग)

इसमें से ज़मीन के साथ मुफ्त

18 मीटर सड़क पर

2.00

87,000

54,500

60 मीटर सड़क पर

4.00

1,74,000

65,300

ग्रोथ कॉरिडोर क्षेत्र में 60 मीटर सड़क पर

5.00

2,18,000

65,300, और 43,500 अतिरिक्त मुफ्त

यानी वही एक एकड़ सड़क के हिसाब से ढाई गुना तक अलग निर्माण दे सकता है। लेकिन साथ में दूसरी सच्चाई भी देखिए। 60 मीटर की सड़क पर भी ज़मीन के साथ सिर्फ लगभग 65,000 वर्ग फुट आता है, बाकी एक लाख से ज़्यादा वर्ग फुट खरीदना पड़ेगा।

एक आम निवेशक के लिए इसका मतलब साफ है। जो व्यक्ति ज़मीन की कीमत अधिकतम FAR को मानकर तय करेगा, वह दो बार भुगतान करेगा, एक बार ज़मीन के मालिक को और दूसरी बार सरकार और TDR बाज़ार को। प्रीमियम FAR की दर इस प्रारूप में तय नहीं दिखती, इसलिए असली लागत उसके नियम आने पर ही साफ होगी।

छोटे प्लॉट वालों के लिए राहत और शर्तें

  • प्लॉटेड मकानों में स्टिल्ट पार्किंग सभी आकार के प्लॉट पर मान्य होगी और यह FAR तथा ऊंचाई में नहीं गिनी जाएगी।
  • प्लॉटेड और स्वयं के आवास के मामलों में बेस से ऊपर का पूरा FAR प्रीमियम देकर लिया जा सकेगा, TDR खरीदने की बाध्यता नहीं होगी।
  • 288 वर्ग मीटर से छोटे प्लॉट पर बेसमेंट नहीं बनेगा।
  • FAR उतना ही मिलेगा जितनी पार्किंग आप दे पाएंगे। पार्किंग अब FAR की असली सीमा बन गई है।
  • जो लेआउट नई योजना लागू होने से पहले स्वीकृत हैं, उनके प्लॉट पुराने मापदंड चुन सकेंगे।
 

खोज 3: 51 किलोमीटर का ग्रोथ कॉरिडोर, भोपाल का नया “सुपर कॉरिडोर“

अगर मुझे पूरे प्रारूप में से सिर्फ एक प्रस्ताव चुनना हो जो रियल एस्टेट का नक्शा बदल देगा, तो वह ग्रोथ कॉरिडोर है। नर्मदापुरम रोड से इंदौर रोड तक के 51 किलोमीटर लंबे बायपास को 75 मीटर चौड़ा करके ग्रोथ कॉरिडोर बनाने की योजना है। इसके दोनों ओर 300 मीटर तक की पट्टी ऊंचे घनत्व और मिश्रित उपयोग के लिए होगी, और यह पूरी 675 मीटर चौड़ी पट्टी TOD ज़ोन भी मानी जाएगी।

इस कॉरिडोर को क्या खास बनाता है

  • मुफ्त अतिरिक्त FAR। यहां अधिकतम FAR के ऊपर 1.0 FAR निःशुल्क मिलेगा। 75 मीटर की सड़क पर वैसे भी FAR की कोई ऊपरी सीमा नहीं है, यानी कॉरिडोर के सामने की ज़मीन पर ऊंचाई की संभावना सबसे ज़्यादा है।
  • बड़े प्लॉट की शर्त। कॉरिडोर से सटी ज़मीन पर अनुमति कम से कम 4,000 वर्ग मीटर के प्लॉट पर ही मिलेगी। अंदर की पट्टी में न्यूनतम 500 वर्ग मीटर और 12 मीटर की आंतरिक सड़क चाहिए।
  • विलय पर कोई सीमा नहीं। पहले से स्वीकृत लेआउट के प्लॉटों को जोड़ा जा सकेगा और जोड़ने की कोई अधिकतम सीमा नहीं होगी।
  • पूरे प्रोजेक्ट को लाभ। अगर कोई प्रोजेक्ट 300 मीटर की पट्टी से आगे तक फैला है, तो पूरे प्रोजेक्ट पर कॉरिडोर के प्रोत्साहन लागू रहेंगे।
  • भविष्य का परिवहन। 75 मीटर के सेक्शन में मास रैपिड ट्रांजिट, सर्विस रोड और वृक्षारोपण की जगह रखी गई है। अगले दस साल में भारी वाहनों के लिए एक और बाहरी बायपास बनेगा, जिसके बाद यह सड़क शहर की मुख्य धमनी बन जाएगी।
 

मीडिया रिपोर्टिंग के अनुसार कॉरिडोर लगभग 3,000 हेक्टेयर में फैला होगा, एयरपोर्ट, प्रस्तावित वाणिज्यिक केंद्रों और उपनगरों को जोड़ेगा, और यहां आईटी, AI, डेटा सेंटर, लॉजिस्टिक्स, मॉल और कॉरपोरेट दफ्तरों को बढ़ावा दिया जाएगा (नवभारत)। प्रारूप कहता है कि भोपाल विकास प्राधिकरण प्राथमिकता से यहां नगर विकास स्कीम घोषित कर सकेगा और इसका वित्तपोषण केंद्र सरकार के अर्बन चैलेंज फंड से भी हो सकता है।

इंदौरवासी होने के नाते मुझे यह पढ़ते हुए बार बार सुपर कॉरिडोर याद आया। फर्क यह है कि भोपाल ने इस बार कॉरिडोर के साथ FAR का प्रोत्साहन, विलय की छूट और परिवहन की जगह, तीनों को एक साथ योजना में लिख दिया है।

खोज 4: मेट्रो के किनारे 500 मीटर, लेकिन एक शर्त के साथ

भोपाल 2047 में हर मौजूदा और भविष्य की मेट्रो लाइन के दोनों ओर 500 मीटर का क्षेत्र ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट यानी TOD ज़ोन घोषित किया गया है। विचार सीधा है। जहां मेट्रो है, वहां ज़्यादा लोग रहें, काम करें और खरीदारी करें, ताकि सड़कों पर गाड़ियां कम हों।

इस ज़ोन में मिश्रित उपयोग मान्य होगा, पहले से स्वीकृत लेआउट के प्लॉटों को बिना किसी अधिकतम सीमा के जोड़ा जा सकेगा, और 12 मीटर या उससे चौड़ी सड़क पर स्थित प्लॉटों पर भी मिश्रित उपयोग की अनुमति होगी। जो प्लॉट पूरी तरह या आंशिक रूप से 500 मीटर के दायरे में आता है, उसे TOD में शामिल माना जाएगा। भोपाल मेट्रो का पहला चरण 27.8 किलोमीटर का है और प्रस्तावित नेटवर्क लगभग 95.8 किलोमीटर का, इसलिए यह नियम आने वाले वर्षों में शहर के बड़े हिस्से को छुएगा।

वह शर्त जिसे ज़्यादातर लोग नज़रअंदाज़ करेंगे

प्रारूप साफ कहता है कि TOD क्षेत्र में प्रीमियम FAR का लाभ तभी मिलेगा जब वह ज़मीन संबंधित प्राधिकरण द्वारा तैयार किए गए लोकल एरिया प्लान यानी LAP का हिस्सा होगी। LAP ही तय करेगा कि किस सड़क को चौड़ा करना है, पार्किंग कहां होगी, और पैदल चलने वालों के लिए क्या व्यवस्था होगी।

मेरी सलाह यह है कि मेट्रो के पास ज़मीन खरीदने वाला हर व्यक्ति यह समझे कि उसकी ज़मीन का असली लाभ सरकार की फाइल की रफ्तार पर टिका है। जब तक LAP नहीं बनता, तब तक TOD का वादा कागज़ पर ही रहेगा।

पैसा कहां से आएगा

प्रारूप TOD क्षेत्रों के लिए एक अलग शहरी अधोसंरचना विकास कोष बनाने की बात करता है, जिसमें बेटरमेंट लेवी और सेस जैसे शुल्क जमा होंगे। सीधी भाषा में, मेट्रो से जिसकी ज़मीन की कीमत बढ़ेगी, उससे उस बढ़ोतरी का एक हिस्सा शहर के विकास के लिए लिया जाएगा। पार्किंग के लिए भी एक दिलचस्प प्रोत्साहन है। बहुस्तरीय सार्वजनिक पार्किंग बनाने वाले को 10 प्रतिशत वाणिज्यिक निर्माण की पात्रता मिलेगी।

खोज 5: पुराना शहर अब बोझ नहीं, अवसर है

हर शहर का पुराना हिस्सा सबसे ज़्यादा कीमती ज़मीन पर होता है, लेकिन वहां पुरानी इमारतें, संकरी गलियां और उलझे मालिकाना हक विकास को रोक देते हैं। भोपाल 2047 ने इस समस्या के लिए “क्रिएटिव री–डेवलपमेंट” नाम से एक पूरा ढांचा रखा है।

  • पुनर्विकास पर बेस FAR 2.5। मध्यप्रदेश पुनर्विकास नीति 2022 के तहत लिए गए प्रोजेक्ट को बेस FAR 2.5 मिलेगा, जो नई ज़मीन पर मिलने वाले 1.25 का दोगुना है।
 
  • 70 प्रतिशत की सहमति से सोसायटी खुद आगे आ सकेगी। किसी पुरानी बहुमंजिला इमारत के 70 प्रतिशत रहवासी सहमत हों, तो रहवासी संघ खुद पुनर्विकास की योजना ले सकेगा और जिला प्रशासन इसमें सहयोग करेगा। यह प्रावधान उन हज़ारों परिवारों के लिए उम्मीद है जो जर्जर फ्लैटों में रह रहे हैं।
 
  • एक सड़क पर पांच प्रोजेक्ट, तो सुविधाएं निगम बढ़ाएगा। अगर किसी सड़क पर पांच से ज़्यादा पुनर्विकास प्रोजेक्ट आते हैं, तो वहां का सीवर, बिजली और पानी मज़बूत करना नगर निगम की ज़िम्मेदारी होगी, और इसका खर्च प्रीमियम FAR से जमा राशि से हो सकेगा।
 
  • सरकारी पुरानी संपत्तियों का पुनर्घनत्वीकरण। पुरानी सरकारी और अर्ध सरकारी संपत्तियों का पुनर्विकास पुनर्घनत्वीकरण नीति 2022 से होगा।
 
  • झुग्गी पुनर्वास में बेस FAR ही अधिकतम FAR। झुग्गी बस्तियों के पुनर्विकास में बेस FAR को अधिकतम FAR के बराबर कर दिया गया है, ताकि डेवलपर के लिए यह आर्थिक रूप से संभव हो।
 
  • नियमित हुई अवैध कॉलोनियों को भी रास्ता। जो अवैध कॉलोनियां कॉलोनाइज़र नियमों के तहत नियमित हो चुकी हैं, वहां भी पुनर्विकास हो सकेगा और बहुमंजिला निर्माण पर क्रिएटिव डेवलपमेंट के प्रोत्साहन लागू होंगे।
 

पुराने भोपाल के लिए अलग नियम

दीवारों वाले पुराने शहर को ओल्ड सिटी हेरिटेज ज़ोन बनाया गया है। यहां विरासत बचाने वाले भूमि स्वामियों को हेरिटेज TDR मिलेगा, जिसे वे बेच सकेंगे। मोहल्लों के हिसाब से FAR 1.25 से 1.75 तय किया गया है, 9 मीटर से संकरी गलियों पर यह 0.25 कम होगा, और प्लॉट के आकार के हिसाब से 40 से 75 प्रतिशत तक निर्माण क्षेत्र की अनुमति है।

इंदौर के राजवाड़ा, सराफा, जवाहर मार्ग और पुराने मोहल्लों के लिए मुझे यही ढांचा सबसे ज़्यादा प्रासंगिक लगता है। हमारे पुराने शहर में बहुत सी ज़मीन कम उपयोग में पड़ी है, और अगर यह मॉडल इंदौर में आता है तो पुराने शहर में नई जान आ सकती है।

खोज 6: जहां विकास नहीं होगा, वह भी उतना ही महत्वपूर्ण है

रियल एस्टेट में हम अक्सर यह देखते हैं कि कहां बनेगा। मैं आपको यह भी देखने की सलाह दूंगा कि कहां नहीं बनेगा, क्योंकि सबसे बड़े नुकसान वहीं होते हैं। भोपाल 2047 के 1,016.90 वर्ग किलोमीटर में से लगभग 40 प्रतिशत, यानी करीब 40,673 हेक्टेयर, कृषि क्षेत्र और भोजताल प्रभाव क्षेत्र में रखा गया है। शहरी विकास योग्य हिस्सा लगभग 61,017 हेक्टेयर है।

भोजताल के चारों ओर तीन घेरे

बड़े तालाब यानी भोजताल को बचाने के लिए तीन स्तर के क्षेत्र बनाए गए हैं। पहला BIZ-0, जो झील के पूर्ण जल स्तर के भीतर का हिस्सा है। दूसरा BIZ-1, जो उससे लगा बफर है। तीसरा BIZ-2, जो जलग्रहण क्षेत्र का बाकी हिस्सा है, और इसमें आने वाले गांवों की आबादी का विस्तार भी सीमित रखा गया है। जिन भूमि स्वामियों की ज़मीन जल निकायों के बफर में आती है, उन्हें ग्रीन TDR मिलेगा, जिसे वे शहर के दूसरे हिस्सों में बिल्डरों को बेच सकेंगे।

हरियाली अब शर्त है, सजावट नहीं

  • शहर का हरित क्षेत्र 2005 के लगभग 16 प्रतिशत से बढ़ाकर 27 प्रतिशत करने का प्रस्ताव है (नवभारत)।
 
  • हर कॉलोनी में कम से कम 12 प्रतिशत सामुदायिक खुला क्षेत्र होगा, जिसका 30 प्रतिशत घने पेड़ों वाला क्षेत्र और 30 प्रतिशत खेल का मैदान होगा, और कम से कम आधा हिस्सा एक ही जगह पर देना होगा।
 
  • इसके अलावा लेआउट का 2 प्रतिशत हिस्सा पानी की टंकी, बिजली, कचरा प्रबंधन और सौर ऊर्जा जैसी सेवाओं के लिए अलग रखना होगा।
 
  • कृषि क्षेत्र में फार्म हाउस के लिए 20 प्रतिशत खुला क्षेत्र रखना होगा, जिसका आधा घने पेड़ों वाला होगा।
 
  • रेन वाटर हार्वेस्टिंग और भूजल रिचार्ज संरचना हर कॉलोनी में अनिवार्य होगी।
 
  • शहर की ज़्यादातर पहाड़ियां ईको सेंसिटिव ज़ोन घोषित की गई हैं और रातापानी अभयारण्य के ईको सेंसिटिव ज़ोन की सीमाएं भी निवेश क्षेत्र में दर्शाई गई हैं।

 

कृषि ज़ोन में भी सड़क तय करेगी क्या बनेगा

कृषि ज़ोन पूरी तरह बंद नहीं है। 7.5 मीटर की सड़क पर खेती, डेयरी, नर्सरी, फार्म हाउस और कृषि पर्यटन जैसी गतिविधियां होंगी। सड़क चौड़ी होने पर कोल्ड स्टोरेज, कृषि आधारित उद्योग, गैर प्रदूषणकारी उद्योग और आईटी जैसी गतिविधियां भी संभव होंगी, और 30 मीटर की सड़क पर लॉजिस्टिक्स पार्क, हाइपर मार्केट और मैरिज गार्डन तक। यानी कृषि ज़ोन की ज़मीन भी चौड़ी सड़क पर हो तो उसकी कहानी अलग होगी।

मेरी नज़र में इस खंड का सबसे बड़ा सबक यह है कि कम कीमत पर मिल रही ज़मीन हमेशा सस्ती नहीं होती। अगर वह बफर, ईको सेंसिटिव ज़ोन या कृषि क्षेत्र में है, तो हो सकता है कि वह अगले बीस साल तक वैसी ही रहे।

खोज 7: सरकार की सबसे ईमानदार स्वीकारोक्ति

पूरे प्रारूप में मुझे सबसे ज़्यादा प्रभावित करने वाली लाइन कोई नया प्रस्ताव नहीं, बल्कि एक स्वीकारोक्ति है। क्रियान्वयन वाले अध्याय में लिखा है कि पिछली विकास योजना के मूल्यांकन से स्पष्ट है कि उसके अधिकांश प्रस्तावों का वास्तविक क्रियान्वयन नहीं हो पाया। यानी सरकार खुद मान रही है कि प्लान बनाना आसान है, उसे ज़मीन पर उतारना कठिन।

कितना पैसा चाहिए

मद

प्रारूप का अनुमान

अगले लगभग 21 साल में विकसित होने वाली ज़मीन

लगभग 30,000 हेक्टेयर

सार्वजनिक उपयोग के लिए अधिग्रहण

लगभग 7,000 हेक्टेयर

अधिग्रहण की लागत, दोगुने मुआवज़े पर

लगभग 14,000 करोड़ रुपये

नगर स्तरीय अधोसंरचना, 1.5 करोड़ रुपये प्रति हेक्टेयर

लगभग 45,000 करोड़ रुपये

कुल

लगभग 59,000 करोड़ रुपये

यह रकम किसी भी नगर निगम या विकास प्राधिकरण के बजट से कई गुना बड़ी है। इसीलिए प्रारूप का असली संदेश यह है कि सरकार अकेले यह काम नहीं करेगी। प्रीमियम FAR, TDR, बेटरमेंट लेवी और निजी क्षेत्र की भागीदारी, ये सब इसी खाई को भरने के औज़ार हैं।

सबसे व्यावहारिक सुधार: निजी डेवलपर बनाएंगे प्लान की सड़कें

अब तक यह होता था कि मास्टर प्लान में सड़क दिखाकर कॉलोनी को अनुमति मिल जाती थी, लेकिन ज़मीन पर सड़क कभी बनती ही नहीं थी, क्योंकि बीच की निजी ज़मीन उपलब्ध नहीं होती थी और सरकार के पास पैसा नहीं होता था। प्रारूप ने इसका एक सीधा रास्ता सुझाया है।

  1. डेवलपर कलेक्टर के सामने आवेदन देगा कि वह प्लान की सड़क खुद बनाना चाहता है। सड़क कम से कम 200 मीटर लंबी और डिवाइडर के साथ चार लेन की होनी चाहिए।
  2. कलेक्टर की अध्यक्षता वाली समिति, जिसमें नगर निगम आयुक्त, विकास प्राधिकरण के CEO, नगर तथा ग्राम निवेश, PWD और SDM होंगे, DPR की जांच करके सैद्धांतिक अनुमति देगी।
  3. डेवलपर सड़क की लागत का 5 प्रतिशत EMD जमा करेगा।
  4. रास्ते में आने वाली निजी ज़मीन प्राधिकरण भूमि स्वामियों को TDR देकर छह महीने में अधिग्रहित करेगा और डेवलपर को सौंपेगा।
  5. डेवलपर छह महीने में सड़क बनाकर प्राधिकरण को सौंपेगा। सड़क पूरी तरह सार्वजनिक रहेगी और उस पर कोई गेट या बाउंड्री नहीं लगेगी।
 

इस व्यवस्था में तीनों पक्ष जीतते हैं। भूमि स्वामी को नकद की जगह TDR मिलता है, डेवलपर को अपने प्रोजेक्ट तक असली सड़क मिलती है, और शहर को बिना बजट खर्च किए सड़क मिलती है। मेरी नज़र में इंदौर के लिए यह प्रावधान सबसे ज़रूरी है, क्योंकि हमारे शहर में भी कई प्लान सड़कें वर्षों से सिर्फ नक्शे पर हैं।

इसके साथ ही प्रारूप में डिजिटल ट्विन सिटी की व्यवस्था भी प्रस्तावित है, जिससे अवैध निर्माण और यातायात पर रियल टाइम नज़र रखी जा सके (नवभारत)।

सरकार की सोच को पढ़ना: प्लान के पीछे छह संकेत

कोई भी मास्टर प्लान सिर्फ नियमों का संग्रह नहीं होता, वह उसे बनाने वालों की सोच का आईना होता है। भोपाल 2047 को पढ़कर मुझे मध्यप्रदेश के योजनाकारों की सोच में छह साफ संकेत दिखे, और यही संकेत इंदौर के प्लान को भी दिशा देंगे।

संकेत 1: बाज़ार पर भरोसा। प्रारूप कहता है कि वह पारंपरिक “प्रीडिक्ट एंड प्रोवाइड” मॉडल को छोड़ रहा है, जिसमें सरकार पहले अनुमान लगाती थी कि कितने घर और कितनी दुकानें चाहिए। अब वह कहता है कि मांग से ज़्यादा फ्लोर स्पेस की अनुमति दी जाए, ताकि कीमतें काबू में रहें और किफायती आवास को बढ़ावा मिले। यह हमारे राज्य की नियोजन सोच में बड़ा वैचारिक बदलाव है।

संकेत 2: FAR अब कमाई का ज़रिया है। प्रारूप खुलकर लिखता है कि प्रीमियम FAR राजस्व सृजन के स्रोत के रूप में काम करेगा। यानी सरकार FAR मुफ्त में नहीं, बल्कि बेचकर देगी, और उसी पैसे से शहर की अधोसंरचना बनेगी।

संकेत 3: सड़क ही नई मुद्रा है। गतिविधि, FAR, ऊंचाई, सब कुछ सड़क की चौड़ाई से जुड़ा है। इसके साथ निजी डेवलपर को प्लान सड़क बनाने की अनुमति देकर सरकार ने सड़क को विकास का इंजन बना दिया है।

संकेत 4: फैलाव नहीं, घनत्व। प्रारूप बार बार कहता है कि शहर को बिना योजना के बाहर की ओर “लीपफ्रॉगिंग” से बचाना है और मेट्रो तथा कॉरिडोर के पास ज़्यादा लोग बसाने हैं। यानी दूर की सस्ती ज़मीन से ज़्यादा महत्व अब शहर के भीतर अच्छी तरह जुड़ी ज़मीन का होगा।

संकेत 5: ज़मीनी सच्चाई को कानूनी रूप देना। मिश्रित उपयोग, नियमित कॉलोनियों का पुनर्विकास, और पुराने स्वीकृत लेआउट को पुराने नियम चुनने का विकल्प, ये सब बताते हैं कि सरकार अब शहर को जैसा वह है, वैसा स्वीकार करके आगे बढ़ना चाहती है। भोपाल की सीलिंग का अनुभव इसमें साफ झलकता है।

संकेत 6: पर्यावरण पर रोक नहीं, सौदा। जल निकायों के बफर और विरासत क्षेत्रों को सिर्फ प्रतिबंधित करने की जगह भूमि स्वामियों को ग्रीन और हेरिटेज TDR दिया गया है। यह संरक्षण को आर्थिक रूप से संभव बनाने का तरीका है।

राज्य की नीतियों का एक ही ढांचा

एक और बात ध्यान देने लायक है। प्रारूप ने राज्य की कई नीतियों को सीधे अपना हिस्सा बना लिया है, जैसे मध्यप्रदेश एकीकृत टाउनशिप नीति 2025, पुनर्विकास नीति 2022, पुनर्घनत्वीकरण नीति 2022, हस्तांतरणीय विकास अधिकार नियम 2018 और सुराज नीति 2023। ये सब राज्य स्तर की नीतियां हैं, भोपाल की नहीं। इसलिए मेरा मानना है कि इंदौर का प्लान भी इन्हीं नीतियों के ढांचे पर खड़ा होगा।

और अंत में, प्रारूप अपनी सोच को विकसित भारत 2047 से जोड़ता है और प्रधानमंत्री के उस कथन को उद्धृत करता है कि अमृत काल में शहरी योजना ही हमारे शहरों का भाग्य तय करेगी। 2047 का क्षितिज संयोग नहीं है, यह राष्ट्रीय दिशा के साथ तालमेल है।

यही 2047 की सोच सिर्फ भोपाल या इंदौर की शहरी योजना तक सीमित नहीं है। मध्यप्रदेश के लिए भी यह समय राज्य के बुनियादी ढांचे, रोजगार, निवेश, उद्योग और शहरों के विकास को एक लंबी अवधि की दिशा देने का है। मध्यप्रदेश के 2047 तक विकसित राज्य बनने की रणनीति को समझना इस पूरी तस्वीर को और स्पष्ट करता है।

इंदौर आज कहां खड़ा है

भोपाल से इंदौर का अनुमान लगाने से पहले यह समझना ज़रूरी है कि आज इंदौर की ज़मीन पर क्या हो चुका है। मेरी रिसर्च में पांच बातें सबसे अहम निकलीं।

1. मास्टर प्लान की अवधि पांच साल पहले खत्म हो चुकी है। इंदौर का मौजूदा मास्टर प्लान 2008 में आया और 2021 में खत्म हो गया। अप्रैल 2025 की रिपोर्टिंग के अनुसार नए प्लान में शहर से लगे 79 गांवों को जोड़ा जाना है (ई खबर टुडे)। जब तक नया प्लान नहीं आता, इन गांवों की ज़मीन का भविष्य तय नहीं होता, और इसका सीधा असर उन किसानों और भूमि स्वामियों पर है जिनकी ज़मीन वहां है।

2. FAR बढ़ाने की चर्चा पहले से है। उसी रिपोर्ट के अनुसार इंदौर में अभी FAR लगभग 2.5 से 3 तक है, और चौड़ी सड़कों पर इसे बढ़ाकर 6 तक करने की तैयारी की बात कही गई थी, जिसका सीधा लाभ सुपर कॉरिडोर और बायपास जैसे इलाकों को मिलेगा (ई खबर टुडे)। भोपाल के प्रारूप ने दिखा दिया है कि ऊंचा FAR किस रूप में आएगा, इस पर मैं आगे बात करूंगा।

3. मेट्रो शहर के बीच पहुंच चुकी है। 6 सितंबर 2026 से इंदौर मेट्रो 16 स्टेशनों के साथ 17 किलोमीटर पर चल रही है, गांधी नगर से सुपर कॉरिडोर, भौंरासला, MR-10, ISBT, विजय नगर होते हुए मालवीय नगर यानी रेडिसन चौराहे तक। लगभग 31 किलोमीटर का पूरा घेरा पलासिया, रेलवे स्टेशन, राजवाड़ा और एयरपोर्ट होते हुए वापस गांधी नगर तक जाना है (न्यूज़ड्रम)।

4. दो नए आउटर रिंग रोड। इंदौर के चारों ओर पूर्वी हिस्से में लगभग 70 किलोमीटर और पश्चिमी हिस्से में लगभग 64 किलोमीटर के नए बायपास की योजना है, जिनकी लागत करीब 7,000 करोड़ रुपये बताई गई थी (ईटीवी भारत)।

5. इंदौर अब सिर्फ शहर नहीं, महानगर क्षेत्र बनने जा रहा है। राज्य सरकार ने मेट्रोपॉलिटन एक्ट को मंज़ूरी दी है। रिपोर्टिंग के अनुसार इंदौर महानगर क्षेत्र में इंदौर, उज्जैन, देवास, धार और शाजापुर, पांच ज़िले जुड़ेंगे, इसका दायरा लगभग 9,000 वर्ग किलोमीटर होगा और योजना 75 लाख की आबादी के हिसाब से बनेगी (अमर उजाला)।

भोपाल और इंदौर, आमने सामने

विषय

भोपाल

इंदौर

चालू मास्टर प्लान

2005 तक के लिए बना, 1995 में प्रकाशित

2021 तक के लिए बना, 2008 में लागू

नया प्लान

2047 का प्रारूप 25 सितंबर 2026 को प्रकाशित

प्रारूप का इंतज़ार

चालू मेट्रो

पहला चरण 27.8 किमी प्रस्तावित नेटवर्क में

17 किमी, 16 स्टेशन

नया बायपास

51 किमी ग्रोथ कॉरिडोर प्रस्तावित

पूर्वी और पश्चिमी आउटर रिंग रोड, लगभग 134 किमी

महानगर क्षेत्र

प्रस्तावित

पांच ज़िले, लगभग 9,000 वर्ग किमी प्रस्तावित

इस तुलना से एक बात साफ है। इंदौर के पास वह सब कुछ पहले से है जिसके इर्द गिर्द भोपाल ने अपना प्लान बनाया है, यानी चलती मेट्रो, नए बायपास, और तेज़ी से फैलता शहर। कमी सिर्फ उस नक्शे की है जो इन सबको एक नियम में बांधे।

इंदौर मास्टर प्लान के लिए मेरे आठ अनुमान

साफ कर दूं कि इंदौर का प्रारूप अभी आया नहीं है, इसलिए नीचे लिखी बातें घोषणाएं नहीं, मेरे अनुमान हैं। लेकिन ये अनुमान हवा में नहीं हैं। हर अनुमान के पीछे भोपाल के प्रारूप का कोई ठोस प्रावधान है, और मैंने हर अनुमान के साथ अपना भरोसा भी लिखा है।

अनुमान

भोपाल में आधार

मेरा भरोसा

सड़क की चौड़ाई पर आधारित जोनिंग और मिश्रित उपयोग

पूरे प्रारूप का मूल ढांचा

बहुत ऊंचा

कम बेस FAR, बाकी प्रीमियम और TDR से

1.25 और 1.5 का बेस, 50:50 खरीद

बहुत ऊंचा

मेट्रो के दोनों ओर 500 मीटर का TOD, LAP की शर्त के साथ

TOD ज़ोन सभी मौजूदा और भविष्य की लाइनों पर

बहुत ऊंचा

पुनर्विकास पर बेस FAR 2.5 और 70 प्रतिशत सहमति का नियम

राज्य की पुनर्विकास नीति 2022

बहुत ऊंचा

निजी डेवलपर द्वारा प्लान सड़कों का निर्माण

क्रियान्वयन अध्याय का प्रस्ताव

ऊंचा

किसी रिंग रोड या बायपास पर ग्रोथ कॉरिडोर और मुफ्त अतिरिक्त FAR

51 किमी ग्रोथ कॉरिडोर

मध्यम

तालाबों और नदियों के आसपास बफर और ग्रीन TDR

भोजताल के तीन प्रभाव क्षेत्र

मध्यम

महानगर क्षेत्र और उज्जैन की ओर विकास से तालमेल

भोपाल का बहु उपनगरीय ढांचा

मध्यम

इन अनुमानों को थोड़ा खोलकर समझिए

1. “FAR 6” की खबर को सही तरीके से पढ़िए। इंदौर में FAR बढ़ाने की चर्चा ज़ोरों पर है। भोपाल का मॉडल बताता है कि ऊंचा FAR आएगा, लेकिन चौड़ी सड़कों और बड़े प्लॉटों पर, और वह भी ज़्यादातर खरीदकर। इसलिए मेरा अनुमान है कि इंदौर में अधिकतम FAR की हेडलाइन भले ऊंची हो, लेकिन ज़मीन के साथ मुफ्त मिलने वाला FAR आज के मुकाबले कम भी हो सकता है। जो भूमि स्वामी “FAR 6” सुनकर अपनी ज़मीन की कीमत तय करेगा, उसे यह फर्क समझना होगा।

2. मेट्रो लाइन इंदौर का सबसे बड़ा TOD बेल्ट बनेगी। गांधी नगर से सुपर कॉरिडोर, MR-10, विजय नगर और रेडिसन चौराहे तक चल रही मेट्रो के दोनों ओर 500 मीटर की पट्टी ऊंचे घनत्व और मिश्रित उपयोग का सबसे स्वाभाविक क्षेत्र है। जैसे जैसे मेट्रो पलासिया, राजवाड़ा और एयरपोर्ट की ओर बढ़ेगी, पुराने शहर के बड़े हिस्से भी इस दायरे में आएंगे। शर्त वही रहेगी, LAP जितनी जल्दी बने, लाभ उतनी जल्दी।

3. रिंग रोड इंदौर का ग्रोथ कॉरिडोर बन सकता है। भोपाल ने अपने बायपास को ग्रोथ कॉरिडोर बनाया है, और साथ ही लिखा है कि भारी वाहनों के लिए बाहर एक नया बायपास बनेगा। इंदौर में यही स्थिति है। मौजूदा बायपास और नए आउटर रिंग रोड के बीच का रिश्ता भोपाल जैसा ही है। इसलिए मुझे लगता है कि इनमें से किसी एक को ग्रोथ कॉरिडोर जैसा दर्जा मिल सकता है, जहां प्रोत्साहन के साथ बड़े प्लॉटों का विकास होगा।

4. पुराना इंदौर नई जान पा सकता है। राजवाड़ा, सराफा, जवाहर मार्ग और पुराने मोहल्लों के लिए पुनर्विकास का बेस FAR 2.5, हेरिटेज TDR और 70 प्रतिशत सहमति का नियम बहुत बड़ा बदलाव ला सकता है। मेरी नज़र में यह इंदौर का सबसे कम आंका गया अवसर है।

5. जल स्रोतों पर सख्ती, लेकिन मुआवज़े का नया रास्ता। यशवंत सागर, सिरपुर, बिलावली और पिपल्यापाला जैसे जल स्रोतों और कान्ह तथा सरस्वती नदी के किनारों पर भोपाल जैसे बफर आ सकते हैं। ऐसे में उन भूमि स्वामियों को ग्रीन TDR मिल सकता है, जिसकी शहर के बाकी हिस्सों में मांग रहेगी।

6. प्लान की सड़कें आखिरकार बनेंगी। इंदौर में अभी भी मास्टर प्लान की कई सड़कें अधूरी हैं। निजी डेवलपर को TDR के ज़रिए सड़क बनाने की अनुमति मिली, तो नए इलाकों में सड़क पहले और कॉलोनी बाद में, यह सपना सच हो सकता है।

7. इंदौर का प्लान अकेले इंदौर का नहीं होगा। महानगर क्षेत्र की सोच और 2028 के सिंहस्थ के कारण इंदौर उज्जैन की दिशा में विकास पर सरकार का विशेष ध्यान रहेगा। मुझे उम्मीद है कि इंदौर का प्लान पीथमपुर, देवास और उज्जैन की ओर के गलियारों को ध्यान में रखकर बनेगा।

8. 2047 का क्षितिज ही रहेगा। भोपाल की तरह इंदौर का प्लान भी 2041 नहीं, बल्कि 2047 को ध्यान में रखकर आने की पूरी संभावना है, क्योंकि राज्य ने भोपाल का 2031 प्रारूप इसी आधार पर लौटाया था।

आपके लिए इसका मतलब क्या है

मास्टर प्लान हर व्यक्ति पर अलग तरह से असर डालता है। इसलिए मैंने इसे अलग अलग लोगों की नज़र से देखा है।

अगर आप घर खरीदने की सोच रहे हैं

मेट्रो और चौड़ी सड़कों के पास आने वाले वर्षों में ज़्यादा ऊंची इमारतें और ज़्यादा फ्लैट बनेंगे, जिससे वहां आपूर्ति बढ़ेगी। कोई बिल्डर आपको “प्रीमियम लोकेशन” बताए, तो पूछिए कि प्रोजेक्ट किस चौड़ाई की प्लान सड़क पर है और क्या उसकी सारी अनुमतियां पुराने नियमों में हैं या नए में। 12 प्रतिशत खुले क्षेत्र और 30 प्रतिशत घने पेड़ों जैसी शर्तें आने वाली कॉलोनियों को बेहतर बनाएंगी, इसलिए नई कॉलोनी चुनते समय इन्हें भी देखिए।

अगर आपके पास शहर में एक छोटा प्लॉट है

प्लॉटेड मकानों के लिए FAR 1.25 से 1.5 के बीच रहने की संभावना है, स्टिल्ट पार्किंग FAR में नहीं गिनी जाएगी, और अतिरिक्त FAR प्रीमियम देकर लिया जा सकेगा। अगर आपका लेआउट पहले से स्वीकृत है, तो आपके पास पुराने मापदंड चुनने का विकल्प रह सकता है। नक्शा पास कराने से पहले दोनों विकल्पों की तुलना ज़रूर कीजिए।

अगर आप घर के आगे दुकान या दफ्तर चलाते हैं

यह प्लान आपके लिए सबसे बड़ी राहत ला सकता है। मिश्रित उपयोग आने पर आपकी गतिविधि वैध हो सकती है, बशर्ते आपकी सड़क उस गतिविधि के लिए तय चौड़ाई की हो। प्रारूप आने पर सबसे पहले अपनी सड़क की चौड़ाई और उस पर मान्य गतिविधियों की सूची देखिए।

अगर आप किसान हैं या शहर के बाहर ज़मीन रखते हैं

इंदौर के आसपास के 79 गांवों के भूमि स्वामियों के लिए यह प्लान सबसे बड़ा फैसला होगा। आपकी ज़मीन आवासीय ज़ोन में आती है, कृषि में, बफर में या किसी प्रस्तावित सड़क के रास्ते में, इसी से उसका भविष्य तय होगा। अगर आपकी ज़मीन सड़क या सार्वजनिक उपयोग में जाती है, तो भोपाल मॉडल में आपको TDR का विकल्प मिल सकता है। कोई भी सौदा करने से पहले प्रारूप का नक्शा देखिए, और किसी के कहने पर जल्दबाज़ी में ज़मीन मत बेचिए।

अगर आप निवेशक हैं

ज़मीन की कीमत बेस FAR पर लगाइए, अधिकतम FAR पर नहीं। मेट्रो के पास की ज़मीन में LAP की शर्त को जोखिम मानिए। बफर, ईको सेंसिटिव ज़ोन और कृषि क्षेत्र की सस्ती ज़मीन से सावधान रहिए, क्योंकि वह बीस साल तक वैसी ही रह सकती है। और सबसे ज़रूरी, सड़क की चौड़ाई को अपने हर निवेश का पहला पैमाना बनाइए।

अगर आप डेवलपर हैं

ज़मीन खोजते समय 30, 45, 60 और 75 मीटर की प्लान सड़कों पर ध्यान दीजिए और देखिए कि क्या आप 3,000 से 4,500 वर्ग मीटर तक ज़मीन जोड़ सकते हैं। अपने वित्तीय मॉडल में प्रीमियम FAR और TDR को निर्माण लागत की तरह जोड़िए। लंबित अनुमतियां प्रारूप के अंतिम होने से पहले पूरी कीजिए। और पुनर्विकास को गंभीरता से देखिए, क्योंकि पुराने शहर में बेस FAR 2.5 का मतलब है कि सबसे अच्छी लोकेशन पर नया अवसर।

सबसे ज़रूरी बात: आपत्ति दर्ज कराना आपका अधिकार है

प्रारूप प्रकाशित होने के बाद नागरिकों से दावे, आपत्तियां और सुझाव मांगे जाते हैं। यही वह छोटी सी अवधि है जब आपकी आवाज़ सीधे योजना को बदल सकती है। अगर आपकी ज़मीन, दुकान या कॉलोनी पर कोई प्रावधान गलत लगे, तो समय पर लिखित आपत्ति दीजिए। भोपाल वालों के लिए यह अवसर अभी खुला है, और इंदौर वालों के लिए यह जल्द आएगा।

मेरी चिंताएं, और इंदौर का प्लान बेहतर कैसे बन सकता है

भोपाल का प्रारूप कई मायनों में साहसिक है, और मैं इसकी सोच का स्वागत करता हूं। लेकिन एक उद्योग से जुड़े व्यक्ति के रूप में मेरी ज़िम्मेदारी है कि मैं उन बातों को भी सामने रखूं जो मुझे चिंतित करती हैं, ताकि इंदौर का प्लान इनसे सीख सके।

1. पैसे के बिना प्लान सिर्फ नक्शा है। 59,000 करोड़ रुपये की ज़रूरत और यह स्वीकारोक्ति कि पिछले प्लान के ज़्यादातर प्रस्ताव लागू नहीं हुए, दोनों एक साथ पढ़ें तो सवाल उठता है कि इस बार क्या अलग होगा। इंदौर के प्लान में हर बड़े प्रस्ताव के साथ यह भी लिखा होना चाहिए कि पैसा कहां से आएगा और काम कब तक होगा।

2. प्रीमियम FAR की दर अभी अज्ञात है। जब FAR का बड़ा हिस्सा खरीदना है, तो उसकी कीमत ही असली FAR तय करेगी। अगर दर बहुत ऊंची रखी गई, तो ऊंचा FAR सिर्फ कागज़ पर रहेगा और घर महंगे होंगे। मेरा सुझाव है कि प्रीमियम की दर और TDR के बाज़ार की व्यवस्था प्रारूप के साथ ही सार्वजनिक हो, ताकि नागरिक उस पर भी आपत्ति दे सकें।

3. LAP की कोई समय सीमा नहीं। TOD और वाणिज्यिक क्षेत्रों का असली लाभ LAP पर टिका है, लेकिन LAP कब बनेंगे, यह तय नहीं है। इंदौर में मेट्रो कॉरिडोर के LAP के लिए साफ समय सीमा होनी चाहिए, वरना सबसे कीमती ज़मीन वर्षों तक अनिश्चितता में रहेगी।

4. बड़े प्लॉट की शर्तें छोटे भूमि स्वामी को पीछे छोड़ सकती हैं। 3,000 से 4,500 वर्ग मीटर जैसी शर्तें ऊंची इमारतों के लिए ठीक हैं, लेकिन जिस किसान या परिवार के पास आधा एकड़ है, वह इस लाभ से बाहर रह जाएगा। इसका जवाब लैंड पूलिंग और सामूहिक निवेश जैसे मॉडल में है, जहां छोटे भूमि स्वामी मिलकर बड़े प्लॉट का लाभ उठा सकें और उनका हक पारदर्शी तरीके से सुरक्षित रहे। मैं चाहूंगा कि इंदौर का प्लान इसके लिए स्पष्ट नीति रखे।

5. इंदौर को कम घनत्व का बहाना नहीं चाहिए। भोपाल ने अपनी पहाड़ियों और झीलों के कारण लगभग 91 व्यक्ति प्रति हेक्टेयर का घनत्व रखा है, जबकि राष्ट्रीय दिशानिर्देश बड़े शहरों के लिए 125 से 175 की बात करते हैं। इंदौर मालवा के समतल पठार पर बसा है। अगर हम घनत्व कम रखेंगे, तो शहर बाहर फैलेगा, सफर लंबा होगा और अधोसंरचना महंगी होगी।

6. पुनर्विकास के साथ पानी और सीवर की क्षमता। पुराने शहर में FAR बढ़ाने का मतलब है उसी पुरानी पाइपलाइन पर ज़्यादा लोग। भोपाल ने पांच प्रोजेक्ट के बाद सुविधा बढ़ाने की बात कही है, लेकिन इंदौर को यह पहले से योजना में रखना चाहिए।

7. देरी खुद एक कीमत है। भोपाल को 21 साल लगे, इंदौर पांच साल से इंतज़ार में है। इस दौरान न ज़मीन का सही उपयोग हुआ, न किसान को स्पष्टता मिली, न शहर को सड़कें। मेरा सुझाव है कि इंदौर का प्रारूप पूरे GIS नक्शों के साथ ऑनलाइन प्रकाशित हो, ताकि हर नागरिक अपने खसरे का भूमि उपयोग खुद देख सके, और आपत्तियों की सुनवाई एक तय समय सीमा में पूरी हो।

अंत में, एक इंदौरी की बात

मैं मंदसौर से निकलकर इंदौर आया, और इसी शहर ने मुझे वह सब दिया जो आज मेरे पास है। इसलिए जब मैं भोपाल का प्रारूप पढ़ रहा था, तो हर पन्ने पर मेरे मन में एक ही सवाल था। जब इंदौर का नक्शा आएगा, तो क्या हम उसके लिए तैयार होंगे?

भोपाल 2047 ने तीन बातें साफ कर दी हैं। पहली, सरकार अब शहर को बाज़ार की नज़र से देख रही है और FAR को खुला छोड़ने को तैयार है, लेकिन उसकी कीमत के साथ। दूसरी, आने वाले बीस साल में सड़क, मेट्रो और कॉरिडोर ही तय करेंगे कि किस ज़मीन की कीमत बढ़ेगी और किसकी नहीं। तीसरी, पुराने शहर, झीलें और हरियाली अब विकास की बाधा नहीं, बल्कि उसकी शर्त हैं।

मास्टर प्लान किसी शहर का सबसे बड़ा आर्थिक दस्तावेज़ होता है, फिर भी आम आदमी उसे पढ़ता नहीं है। मेरा आग्रह है कि जब इंदौर का प्रारूप आए, तो उसे सिर्फ बिल्डर, अफसर और नेता नहीं, बल्कि हर वह इंदौरी पढ़े जिसके पास ज़मीन का एक टुकड़ा है, घर के आगे एक दुकान है, या इस शहर के लिए एक सपना है। क्योंकि अगले बीस साल का इंदौर उसी नक्शे पर बनेगा, और उस नक्शे में हमारी आवाज़ होनी चाहिए।

आपकी ज़मीन, आपकी कॉलोनी या आपके व्यापार पर इसका क्या असर हो सकता है, यह सवाल मुझे कमेंट में लिखिए। मैं अगले लेख में सबसे ज़्यादा पूछे गए सवालों के जवाब दूंगा।

मनोज धनोतिया संस्थापक एवं सीईओ, माइक्रोमिट्टी

#IndoreSeyBharatTak

स्रोत

मुख्य स्रोत: भोपाल विकास योजना 2047 (प्रारूप), मध्यप्रदेश राजपत्र, भाग 1, 25 सितंबर 2026, संचालनालय नगर तथा ग्राम निवेश, मध्यप्रदेश। इस लेख के सभी FAR, ज़ोन, क्षेत्रफल और लागत के आंकड़े इसी दस्तावेज़ से लिए गए हैं।

Founder and CEO of Micro Mitti Manoj Dhanotiya
Manoj Dhanotiya Founder of Micro Mitti

Founder and CEO of Micro Mitti

Manoj Dhanotiya is a serial entrepreneur, PropTech innovator, and Founder & CEO of Micro Mitti, India's first co-investment-led PropTech platform.
With over 15 years of experience across technology, SaaS, and real estate, he previously built AiTrillion into a global SaaS platform serving 15,000+ clients in 100+ countries. Recognised with the Economic Times Entrepreneur Award, Times Achievers Award, Realty+ PropTech 40 Under 40, and Madhya Pradesh's "Captains of Industry"  awarded and honoured by Chief Minister Dr. Mohan Yadav.
Driven by the belief that real estate should be accessible to all he advocates on financial literacy and democratized real estate investing. A sought-after speaker and mentor, Manoj is committed to empowering students and entrepreneurs, advancing Bharat-first innovation, and creating accessible pathways to long-term wealth creation.